मंदिर-मस्जिद को लेकर योगी आदित्यनाथ का राहुल गांधी पर वार

मध्य प्रदेश और राजस्थान में चुनाव प्रचार ज़ोरों पर है. दोनों प्रमुख दल कांग्रेस और बीजेपी अपने नामी नेताओं को प्रचार में उतार रही हैं.

इसी क्रम में मध्य प्रदेश में बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार करते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, ''गुजरात में राहुल गांधी ने बहुत मंदिरों के दर्शन किए. लेकिन जब मंदिर में दर्शन के वक़्त वो घुटनों पर बैठे तो पुजारी को बोलना पड़ा कि ये मंदिर है मस्जिद नहीं.''

धार्मिक आस्थाओं का सहारा लेकर बीजेपी का कांग्रेस को घेरने का ये पहला मामला नहीं है.

रविवार को पीएम मोदी ने एक चुनावी रैली में कहा था, ''कांग्रेस एमपी के घोषणापत्र में गाय का गुणगान करती है और केरल में खुले में कांग्रेस के लोग गाय का बछड़ा काटकर उसका मांस खाते हुए तस्वीर निकालते हैं. वो ये बताते हैं कि गोमांस खाना उनका अधिकार है. अब केरल की कांग्रेस सच है या एमपी की, देश को सच बताइए.''

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है.

इस बार चर्चा की वजह है यूनिवर्सिटी की ड्रामा सोसाइटी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम का पोस्टर.

इस पोस्टर में भारत का नक्शा कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट के बगैर दिखाया गया था. यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से ड्रामा क्लब के सेक्रेटरी और प्रेसीडेंट को नोटिस जारी किया गया है.

ये पोस्टर असगर वजाहत के मशहूर नाटक 'जिन लाहौर नई वेख्या' के मंचन के लिए लगाया गया था.

इस पोस्टर पर विवाद इस कदर हुआ कि मंचन से कुछ घंटे पहले ही कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा.

'बीजेपी पर शॉर्ट नोट लिखें'
ये मामला कैलाशहर के श्रीरामपुर सूर्यमणि मेमोरियल हायर सेकेंडरी स्कूल का है. यहां नौवीं क्लास के सोशल साइंस के पेपर के दूसरे हिस्से में सवाल किया गया है कि बीजेपी पर एक शॉर्ट नोट लिखें. 3 नंबर का यह सवाल अनिवार्य था.

अन्य दलों ने इस तरह का सवाल पूछे जाने को शिक्षा का 'भगवाकरण' कहा है.

वहीं, स्कूल के हेडमास्टर अभिजीत भट्टाचार्जी का कहना है कि यह सवाल पूछना तकनीकी रूप से सही है, लेकिन नैतिक रूप से देखें तो इससे बचा जा सकता था. सोशल साइंस के पाठ्यक्रम में राजनीतिक दलों पर एक अध्याय है इसलिए सवाल पूछना ग़लत नहीं है. पर इसके राजनीतिक अर्थ होने कारण इससे बचा भी जा सकता था.

वहीं, बीजेपी के प्रवक्ता अशोक सिन्हा ने इस मामले पर कहा है कि 'यह सवाल पाठ्यक्रम में से है तो यह सही है, लेकिन अगर राजनीतिक कारणों से किया गया है तो ठीक नहीं है. फैसला हेडमास्टर पर है राजनीतिक दलों को इसमें दख़ल नहीं देना चाहिए.'

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