डोनल्ड ट्रंप गोरों के अल्पसंख्यक होने के डर से बना रहे हैं दीवार?
संघीय सरकार का कामकाज आंशिक रूप से ठप होने के कारण कई विभागों के कर्मचारियों को पिछले महीने से वेतन नहीं मिल पाया है.
दरअसल रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप चाहते हैं कि डेमोक्रैट्स के बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा (अमरीकी संसद का निचला सदन) इस दीवार के लिए 5.7 अरब डॉलर का फंड मंज़ूर करे मगर डेमोक्रैट्स इसे अमरीकी नागरिकों के पैसे का दुरुपयोग बताते हुए ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं.
प्रतिनिधि सभा से सरकार का कामकाज शुरू करने वाला विधेयक पारित हो चुका है मगर यह तब तक प्रभावी नहीं हो सकता, जब तक रिपब्लिकन बहुमत वाली सीनेट में पारित न हो जाए.
ट्रंप का कहना है कि अगर दीवार के लिए फ़ंड जारी नहीं किया जाता तो वह इस बात के लिए भी तैयार हैं कि कामबंदी कई सालों तक जारी रहे. इस तरह से रिपब्लिकन और डेमोक्रैट्स के बीच गतिरोध बना हुआ है और कामबंदी जारी है.
दरअसल डोनल्ड ट्रंप 2016 में जब राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे, उन्होंने वादा किया था कि चुने जाने पर वह मेक्सिको के साथ लगती लगभग 3000 किलोमीटर लंबी सीमा पर दीवार बनाकर उसका ख़र्च भी मेक्सिको से वसूलेंगे.
ट्रंप का कहना था कि अमरीका मेक्सिको से आने वाले अवैध प्रवासियों और सीमा के ज़रिये होने वाली ड्रग्स की तस्करी के कारण नुक़सान उठा रहा है और इससे बचने का एक ही कारगर तरीक़ा है- पूरी सीमा पर कंक्रीट की दीवार बना देना.
ट्रंप को अमरीका का राष्ट्रपति बने दो साल हो गए हैं मगर वह अपना वादा पूरा करने की दिशा में कुछ नहीं कर सके हैं. इस बीच अमरीका-मेक्सिको सीमा पर पहले से मौजूद बैरियर बदले तो गए हैं मगर नई दीवार का निर्माण नहीं हो पाया है.
शुरू से ही ट्रंप की यह योजना आलोचना में रही है मगर अभी तक वह इसके निर्माण को लेकर अड़े हुए हैं.
सवाल उठता है कि इस दीवार को बनाना क्या वाक़ई ज़रूरी है या ट्रंप के लिए यह एक राजनीतिक मसला मात्र है?
दिल्ली की जेएनयू में यूएस एंड लैटिन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर अब्दुल नाफ़े बताते हैं कि इस तरह की दीवार की ज़रूरत नहीं है.
वह कहते हैं, "ट्रंप ने चुनाव जीतने के लिए अमरीका के गोरे श्रमिक और निम्न मध्यमवर्ग के मन में यह बात बिठाई कि उनकी सारी आर्थिक समस्याएं हिस्पैनिक (स्पैनिश भाषा बोलने वाले) और मेक्सिको के लोगों के कारण है. मेक्सिको और अमरीका की इतनी बड़ी सीमा है, यह नक़ली बॉर्डर है. यह पहले मेक्सिको का ही हिस्सा था. इसमें कई सारी दीवारें, बाड़ और दीवारें बनी हैं. कुछ क़ुदरती बाधाएं भी हैं जिनसे पार नहीं किया जा सकता."
"इतनी बड़ी सीमा पर दीवार बनाना संभव नहीं है. पहले से ही सीमा पर काफ़ी निगरानी है, कई सारे बॉर्डर चेक पोस्ट हैं. यहां पर गश्त होती रहती है और अवैध रूप से आने वाले लोगों को रोका जाता है. ऐसे में यह तो ट्रंप ने चुनाव में वोट हासिल करने के लिए दीवार बनाने का वादा किया था. दीवार बन गई तो लोग उसे फांदकर भी आ सकते हैं, नीचे से सुरंग बनाकर भी आ सकते हैं."
भले ही अमरीका में श्रमिक और निम्न मध्यम वर्ग को यह लगता हो कि उन्हें अवैध ढंग से आ रहे प्रवासियों के कारण समस्या होती है, मगर यह भी एक सच है कि ये अवैध प्रवासी अमरीका की अर्थव्यवस्था में बहुत अहमियत रखते हैं.
अमरीका की डेलवेयर यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर डॉक्टर मुक़्तदर ख़ान बताते हैं कि इन अवैध प्रवासियों पर अमरीका के कई सेक्टर निर्भर करते हैं. लेकिन साथ ही कुछ समस्याएं भी हैं, जिनका अमरीका को सामना करना पड़ता है.
प्रोफ़ेसर मुक़्तदर ख़ान कहते हैं, "अमरीका में कई सालों से 1986 से जो अवैध प्रवासी आ रहे हैं, उनकी संख्या 1 करोड़ 15 लाख के आसपास हो चुकी है. ये मेक्सिको, कोलंबिया और ग्वाटेमाला आदि से आए हैं. तो इस कारण कई दिक़्क़तें हैं. एक तो यह कि वे बहुत मेहनती हैं और गर्म जगहों पर भी सख्त परिश्रम करते हैं. इस कारण अमरीका उनपर निर्भर हो चुका है. जैसे कैलिफोर्निया में स्ट्रॉबरी उगाने और चुनने में बड़ी संख्या में वे काम करते हैं. लोगों के घरों पर भी वे काम करते हैं."
दरअसल रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप चाहते हैं कि डेमोक्रैट्स के बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा (अमरीकी संसद का निचला सदन) इस दीवार के लिए 5.7 अरब डॉलर का फंड मंज़ूर करे मगर डेमोक्रैट्स इसे अमरीकी नागरिकों के पैसे का दुरुपयोग बताते हुए ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं.
प्रतिनिधि सभा से सरकार का कामकाज शुरू करने वाला विधेयक पारित हो चुका है मगर यह तब तक प्रभावी नहीं हो सकता, जब तक रिपब्लिकन बहुमत वाली सीनेट में पारित न हो जाए.
ट्रंप का कहना है कि अगर दीवार के लिए फ़ंड जारी नहीं किया जाता तो वह इस बात के लिए भी तैयार हैं कि कामबंदी कई सालों तक जारी रहे. इस तरह से रिपब्लिकन और डेमोक्रैट्स के बीच गतिरोध बना हुआ है और कामबंदी जारी है.
दरअसल डोनल्ड ट्रंप 2016 में जब राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे, उन्होंने वादा किया था कि चुने जाने पर वह मेक्सिको के साथ लगती लगभग 3000 किलोमीटर लंबी सीमा पर दीवार बनाकर उसका ख़र्च भी मेक्सिको से वसूलेंगे.
ट्रंप का कहना था कि अमरीका मेक्सिको से आने वाले अवैध प्रवासियों और सीमा के ज़रिये होने वाली ड्रग्स की तस्करी के कारण नुक़सान उठा रहा है और इससे बचने का एक ही कारगर तरीक़ा है- पूरी सीमा पर कंक्रीट की दीवार बना देना.
ट्रंप को अमरीका का राष्ट्रपति बने दो साल हो गए हैं मगर वह अपना वादा पूरा करने की दिशा में कुछ नहीं कर सके हैं. इस बीच अमरीका-मेक्सिको सीमा पर पहले से मौजूद बैरियर बदले तो गए हैं मगर नई दीवार का निर्माण नहीं हो पाया है.
शुरू से ही ट्रंप की यह योजना आलोचना में रही है मगर अभी तक वह इसके निर्माण को लेकर अड़े हुए हैं.
सवाल उठता है कि इस दीवार को बनाना क्या वाक़ई ज़रूरी है या ट्रंप के लिए यह एक राजनीतिक मसला मात्र है?
दिल्ली की जेएनयू में यूएस एंड लैटिन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर अब्दुल नाफ़े बताते हैं कि इस तरह की दीवार की ज़रूरत नहीं है.
वह कहते हैं, "ट्रंप ने चुनाव जीतने के लिए अमरीका के गोरे श्रमिक और निम्न मध्यमवर्ग के मन में यह बात बिठाई कि उनकी सारी आर्थिक समस्याएं हिस्पैनिक (स्पैनिश भाषा बोलने वाले) और मेक्सिको के लोगों के कारण है. मेक्सिको और अमरीका की इतनी बड़ी सीमा है, यह नक़ली बॉर्डर है. यह पहले मेक्सिको का ही हिस्सा था. इसमें कई सारी दीवारें, बाड़ और दीवारें बनी हैं. कुछ क़ुदरती बाधाएं भी हैं जिनसे पार नहीं किया जा सकता."
"इतनी बड़ी सीमा पर दीवार बनाना संभव नहीं है. पहले से ही सीमा पर काफ़ी निगरानी है, कई सारे बॉर्डर चेक पोस्ट हैं. यहां पर गश्त होती रहती है और अवैध रूप से आने वाले लोगों को रोका जाता है. ऐसे में यह तो ट्रंप ने चुनाव में वोट हासिल करने के लिए दीवार बनाने का वादा किया था. दीवार बन गई तो लोग उसे फांदकर भी आ सकते हैं, नीचे से सुरंग बनाकर भी आ सकते हैं."
भले ही अमरीका में श्रमिक और निम्न मध्यम वर्ग को यह लगता हो कि उन्हें अवैध ढंग से आ रहे प्रवासियों के कारण समस्या होती है, मगर यह भी एक सच है कि ये अवैध प्रवासी अमरीका की अर्थव्यवस्था में बहुत अहमियत रखते हैं.
अमरीका की डेलवेयर यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर डॉक्टर मुक़्तदर ख़ान बताते हैं कि इन अवैध प्रवासियों पर अमरीका के कई सेक्टर निर्भर करते हैं. लेकिन साथ ही कुछ समस्याएं भी हैं, जिनका अमरीका को सामना करना पड़ता है.
प्रोफ़ेसर मुक़्तदर ख़ान कहते हैं, "अमरीका में कई सालों से 1986 से जो अवैध प्रवासी आ रहे हैं, उनकी संख्या 1 करोड़ 15 लाख के आसपास हो चुकी है. ये मेक्सिको, कोलंबिया और ग्वाटेमाला आदि से आए हैं. तो इस कारण कई दिक़्क़तें हैं. एक तो यह कि वे बहुत मेहनती हैं और गर्म जगहों पर भी सख्त परिश्रम करते हैं. इस कारण अमरीका उनपर निर्भर हो चुका है. जैसे कैलिफोर्निया में स्ट्रॉबरी उगाने और चुनने में बड़ी संख्या में वे काम करते हैं. लोगों के घरों पर भी वे काम करते हैं."
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