राजा-रानियों के यौन संबंधों पर बात करने लगी हैं फ़िल्में

हॉलीवु़ड फ़िल्म 'द फेवरेट' साल 2018 की सबसे चर्चित फ़िल्म कही जा रही है. 'द फ़ेवरेट' इस बार कई अवार्ड की रेस में शामिल की गई है.

इस फ़िल्म को दस कैटेगरी में ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया है. वहीं बाफ़्टा अवार्ड की 12 कैटेगरी के लिए 'द फ़ेवरेट' को नामांकन मिले हैं. गोल्डेन ग्लोब अवार्ड तो इस फ़िल्म ने जीत ही लिए हैं.

'द फ़ेवरेट' फ़िल्म में अपने रोल के लिए गोल्डेन ग्लोब पुरस्कार विजेता और ऑस्कर अवार्ड के लिए नामांकित अभिनेत्री ओलिविया कोलमैन ने बीबीसी को बताया कि, " 'द फ़ेवरेट' ने ऐतिहासिक फिल्मों को नई ज़िंदगी दी है. इस फ़िल्म को देखते हुए आप उस दौर में जीने का एहसास कर सकते हैं."

ओलिविया कोलमैन ने 'द फ़ेवरेट' फ़िल्म में ब्रितानी महारानी एन का किरदार निभाया है.

इस फ़िल्म में महारानी एन और डचेज़ ऑफ़ मार्लबोरो सारा के बीच मोहब्बत के रिश्ते को दिखाया गया है.

मज़े की बात ये है कि 2018 में ऐसी कई फ़िल्में बड़े पर्दे पर आईं, जो ऐतिहासिक किरदारों और कहानियों पर आधारित थीं. इन सब में 'द फ़ेवरेट' ने बाज़ी मार ली.

ऐतिहासिक फ़िल्में बनाना बहुत मुश्किल होता है. इन में दिखाए जाने वाले महलों के सेट, सेनाओं की तादाद और पोशाकों पर बहुत रक़म ख़र्च होती है.

फ़िल्में मंहगी लेकिन अवार्डकम

हॉलीवुड फ़िल्मों के हालिया इतिहास पर नज़र डालें, तो ब्रेवहार्ट (1995) और ग्लैडिएटर (2000) फ़िल्मों का ही बजट 10 करोड़ डॉलर से ज़्यादा का था. इन्होंने ऑस्कर अवार्ड भी जीते. पर, ऐतिहासिक फ़िल्मों को ऐसी कामयाबियां कम ही मिलती हैं.

ऐतिहासिक फ़िल्मों के हिस्से अक्सर रनर अप का दर्जा ही आता रहा है. जैसे कि एलिज़ाबेथ (1998), द लॉयन इन विंटर (1968), और 1963 में आई फ़िल्म क्लियोपैट्रा. क्लियोपैट्रा तो उस वक़्त तक बनी सबसे महंगी फ़िल्म थी.

लेकिन, ग्लैडिएटर जैसी बेहद कामयाब फ़िल्म बनाने वाले निर्देशक रिडले स्कॉट को ऐतिहासिक फ़िल्मों के दुधारी तलवार होने का एहसास तब हुआ, जब उनकी यूरोप के धर्म युद्धों पर बनी फ़िल्म किंगडम ऑफ़ हीवेन (2005) बुरी तरह नाकाम रही थी. उसने एक निर्देशक के तौर पर स्कॉट की इज़्ज़त पर दाग़ लगा दिया था.

लेकिन, इस साल की बात करें तो 'द फ़ेवरेट' फ़िल्म के मुक़ाबले में है एक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म 'मैरी क्वीन ऑफ़ स्कॉट्स'. इसी तरह नेटफ़्लिक्स ने 12 करोड़ डॉलर की रक़म ख़र्च कर के स्कॉटलैंड के मशहूर राजा रॉबर्ट द ब्रूस पर फ़िल्म बनाई है- 'द आउटलॉ किंग'.

वहीं माइक ले 1819 में ब्रिटेन में हुए राजनैतिक हत्याकांड पर 'पीटरलू' नाम से 150 मिनट लंबी फ़िल्म बनाई है. तो, फ्रांस पियर शोएलर ने 'उन पीपल एट सोन रोई' नाम से फ्रांस की क्रांति के दौर पर फ़िल्म बनाई है. ये फ़िल्म 1789 में बस्तील जेल पर हमले से लेकर 1792 में महाराजा लुई को मौत के घाट उतारने के दौर तक की कहानी कहती है.

ब्रिटेन के मेट्रो अख़बार में फ़िल्मों कि समीक्षक लरुश्का इवान-ज़देह कहती हैं कि, "ऐतिहासिक फ़िल्मों में अक्सर गोरे लोगों को मसीहा के तौर पर दिखाय जाता रहा है. लेकिन, अब ऐतिहासिक फ़िल्मों को लेकर बड़ा बदलाव आया है. अब ऐतिहासिक फ़िल्में नए नज़रिए से बनाई जा रही हैं."

'द फ़ेवरेट' के निर्देशक योरगोस लैंथिमोस इस बात पर सहमति जताते हैं. वो कहते हैं कि 'द फ़ेवरेट' बनाने के लिए वो 9 साल से कोशिश कर रहे थे, आख़िरकार महिला किरदारों पर लोग पैसा लगाने के लिए तैयार हो ही गए.

योरगोस कहते हैं कि, "मेरे लिए सबसे अहम बात ये है कि इस फ़िल्म में तीन महिलाओं की कहानी है. आप बड़े पर्दे पर ऐसी कहानियां कम ही देखते हैं. ये उन महिलाओं की सच्ची कहानी है, जिन्होंने अपने आस-पास के बहुत से लोगों की ज़िंदगी पर असर डाला."

मर्दों से घिरी एक ताक़तवर महिला किरदार में दिलचस्पी नई पीढ़ी की सोच से इत्तेफ़ाक़ रखती है. यही वजह है कि 'मैरी, द क्वीन ऑफ़ स्कॉट्स' की ब्रिटिश निर्देशक जोसी रूर्क कहती हैं कि उनकी फ़िल्म सही वक़्त पर रिलीज़ हुई है.

इस फ़िल्म में स्कॉटलैंड की महारानी मैरी और इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ के बीच एक मुलाक़ात को भी दिखाया गया है. जबकि हक़ीक़त में ऐसी मुलाक़ात हुई ही नहीं थी. दोनों ही महारानियों ने अपने दौर की मर्दवादी सोच का अंजाम भुगता था.

जोसी कहती हैं, "इन महारानियों के सारे सलाहकार मर्द थे. ऐसे में इस फ़िल्म से आप को इशारा मिलता है कि वो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कैसी महिला विरोधी सोच से वाबस्ता होती होंगी. फ़िल्म में भले ही कुछ काल्पनिक दृश्य हैं. पर मुझे लगता है कि महिला विरोधी सोच को हम ने जिस तरह दिखाया है, उसे लोग काल्पनिक नहीं मानेंगे."

लेकिन, जहां क्वीन एन का रोल निभाने के लिए मार्गोट रॉबी को बाफ्टा अवार्ड के लिए नामांकन मिला है. वहीं, 'मैरी, क्वीन ऑफ़ स्कॉट्स' को एकेडमी अवार्ड्स में कोई नॉमिनेशन नहीं मिल सका, जबकि महारानी का रोल निभाने वाली अभिनेत्री रोनन के अभिनय की बहुत तारीफ़ हुई है.

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